
एचआईवी(Human Immunodeficiency Virus: HIV) से लड़ने की खोज शोधकर्ता दशकों से करते आ रहे है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन(Johns Hopkins University School of Medicine) के शोधकर्ताओं ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह कहा है कि हमे HIV से लड़ने के लिए एक नायक मिल गया है। वो नायक है..गाय। गाय, इंसान सहित किसी भी जानवर के मुकाबले HIV वायरस के खिलाफ तेजी से एंटीबॉडी(Antibody) का निर्माण करने में सक्षम है। शोधकर्ताओं ने चार गायों को HIV प्रोटीन का एक इंजेक्शन दिया इन चार गायों ने HIV वायरस के खिलाफ तेजी से और शक्तिशाली एंटीबॉडी का निर्माण कर दिया। इससे वैज्ञानिको को इंसानों में भी समान एंटीबॉडी उत्पन्न करने और सीखने में सफलता मिल सकती है यह एंटीबॉडीज(Antibodies) विभिन्न प्रकार के HIV संक्रमण को रोक सकता है। शोध के अनुसार गायों में टीकाकरण(Immunization) के 42 दिनों के बाद ही एंटीबॉडी उत्पन्न हो जाते है। यह शोधपत्र 20 जुलाई को नेचर पत्रिका में प्रकाशित की गई है।
बहुत कम प्रतिशत लोग ही सामान्य HIV संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडीज उत्पन्न कर पाते है उसमें भी काफी साल लग सकते है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रतिरक्षाविज्ञानी जस्टिन बेली(Justin Bailey, Immunologist) का कहना है HIV के खिलाफ मोटे तौर पर सक्रिय एंटीबॉडीज उत्पन्न करने के लिए यह एक नया और अधिक कुशल तरीका हमे मिला है। HIV का टीका बनाना मुश्किल कार्य है क्योंकि वायरस हमेशा अपनी आकृति और स्वभाव बदलते रहते है एक संक्रमित व्यक्ति के शरीर मे ये वायरस हमेशा उत्परिवर्तित(Mutates) होते रहते है। अक्सर देखा गया है कि लोग एंटीबॉडीज विकसित तो करते है लेकिन वो किसी खास बीमारी पर असरदार हो सकते है लेकिन दूसरे बीमारियों के खिलाफ असरदार नही होते। अबतक के जाँच किये गए HIV टीके वायरस को निष्क्रिय करने में असफल रहे है। HIV संक्रमित लोगों में लगभग 1% लोग ही वायरस के खिलाफ प्रभावी एंटीबॉडी का निर्माण कर पाते है हालांकि यह नगण्य उत्पादन संक्रमित लोगों को ज्यादा मदद नही कर सकता।
HIV को निष्क्रिय करने वाले एंटीबॉडीज में कुछ ख़ास विशेषताएं होती है। जिनमें से एक अमीनो एसिड(Amino acid) का एक लंबा हिस्सा है जो एंटीबॉडी सतह से चिपक जाता है। एंटीबॉडीज का यह फैला हिस्सा वायरल सतह को बाँधता है क्योंकि वायरस हमेशा कोशिकाओं में प्रवेश करना चाहता है। HIV वायरस सतहों पर शक्कर की एक मोटी परत चढ़ा देता है जिससे एंटीबॉडीज को उसे बाँधने में मुश्किल हो जाती है। अमीनो एसिड का लंबा हिस्सा वास्तव में कानून के लंबे हाथ के जैसा है जो वायरस के सतह तक पहुंचने में सक्षम हो जाता है।
HIV संक्रमण वाला व्यक्ति सामान्य रूप से निष्क्रिय एंटीबॉडीज(Neutralizing Antibodies), इस एंटीबॉडीज का क्षेत्र जिसे HCDR3 कहा जाता है इसमे लगभग 30 अमीनो एसिड होता है। मानव एंटीबॉडीज के लिए यह सामान्य है लेकिन एक गाय के लिए बहुत ही कम है। इसी कारण हमने गायों को प्रतिरक्षण के लिए चुना है। गाय प्राकृतिक रूप से HCDR3s का निर्माण करते है शायद गायों के पास HIV से लड़ने के लिए ज्यादा प्रतिक्रिया मौजूद है। चार प्रतिरक्षित गायों पर जब विभिन्न प्रकार के HIV वायरस से प्रयोग किया गया तो सभी गायों ने निष्क्रिय एंटीबॉडीज का व्यापक रूप से उत्पादन किया। फिर शोधकर्ताओं ने एक गाय के एंटीबॉडीज को बड़े संख्या में विभिन्न प्रकार के वायरस पर प्रयोग किया। 381 दिन के बाद, गाय का एंटीबॉडी ने लगभग 96%, 117 प्रकार के HIV वायरस को कोशिकाओं में संक्रमण करने से रोक दिया। शोधकर्ताओं ने इस गाय से एक एंटीबॉडी को अलग किया जिसमें 60 अमीनो एसिड के लंबे HCDR3s मौजूद थे जो 72% HIV संक्रमण को रोकने में सक्षम हो सकते है।
इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनिशिएटिव के शोधकर्ता डेविन सोक(Devin Sok) ने टाइम पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा मैं यह परिणाम देखकर आश्चर्यचकित हूँ यह परिणाम हमारे लिए उत्साहवर्धन है। इस नायक ने हमे बता दिया है कि HIV से कैसे लड़ा जाता है। NIAID के प्रमुख शोधविज्ञानी जॉन मस्कोल(John Mascola) ने कहा कि यह प्रयोग हमे ये तो नही बता रहा कि लोगो के लिए HIV टीका कैसे बनाया जा सकता है लेकिन इस प्रयोग से हमे ये पता चल गया है कि प्रतिरक्षा तंत्र वायरस को कैसे निष्क्रिय करता है। अब हम उन प्रतिरक्षा तंत्र को समझने में लगे है जो गायों में मौजूद है और HIV वायरस को नष्ट करने में सक्षम है।
अगर शोधकर्ता इंसानों में भी लंबे HCDR3s के साथ एंटीबॉडीज निर्माण करने में सफल होते है तो यह HIV टीका का आधार हो सकता है। वैसे गाय सामान्य रूप से निष्क्रिय एंटीबॉडीज बनाने में बहुत सक्षम है इसलिए गाय की इस प्राकृतिक कला को HIV उपचार के लिए दवाओं में बदलना संभव हो सकता है। अब हमें पता चल गया है कि गाय अन्य जानवरों के मुकाबले वायरस को रोकने में सबसे प्रभावी है।
स्रोत: Nature Magazine/International Aids Vaccine Initiative & Scripps Research Institute
Johns Hopkins University School of Medicine
National Institute of Allergy and Infectious Diseases (NIAID)
नोट: यह मात्र एक शोध का विषय है। इसे राजनीतिक या धार्मिक परिपेक्ष्य में बिल्कुल न देखा जाय...
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